Monday, May 30, 2011

India and Politics: Mahinder Singh Tikait's Political Journey and Life...

India and Politics: Mahinder Singh Tikait's Political Journey and Life...: "चौधरी महेंद्र सिंह टिकैत (6-10-1935 : 15-5-2011) चौधरी महेंद्र सिंह टिकैत का जन्म मुजफ्फरनगर के कस्बा सिसौली में 6 अक्टूबर 1935 में एक ..."

Friday, May 27, 2011

Wednesday, May 25, 2011

भाकियू के दिवगंत अध्यक्ष चौधरी महेंन्द्र सिंह टिकैत की तेरहवीं

तेरहवीं में शामिल होने वालों में श्री आडवाणी के अलावा हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री ओमप्रकाश चौटाला. राष्ट्रीय लोकदल के अध्यक्ष अजित सिंह . पूर्व मंत्री स्वामी ओमवेश .पूर्व सांसद करतार सिंह भडाना . अनुराधा चौधरी हरेन्द्र मलिक .कांग्रेस नेता राजेन्द्र चौधरी व राजस्थान के गुर्जर नेता किरोडीमल बैंसला समेत बडी संख्या में गणमान्य लोग श्री टिकैत के गांव सिसौली पहुंचे और उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की

तेरहवी के अवसर पर श्री टिकैत के बडे पुत्र नरेश टिकैत को भारतीय किसान यूनियन एवं बालियान खाप के अध्यक्ष के रुप में पगडी बांधी गयी 1 इस मौके पर देश के विभिन्न हिस्सों से किसान यूनियन के पदाधिकारी एवं कार्यकर्ताओं भीं पहुंचे 1

भाजपा नेता श्री आडवाणी ने कहा कि श्री टिकैत एक महान किसान नेता थे 1 उन्होंने अंतिम समय तक किसानों के हितों के लिए संघर्ष किया 1 वह बगैर किसी स्वार्थ के किसानों के हक के लिए आन्दोलन करते रहे

Monday, May 16, 2011

चौ० टिकैत पंचतत्व में विलीन




चौ० टिकैत पंचतत्व में विलीन


मुजफ्फरनगर। भाकियू सुप्रीमो चौ० महेन्द्र सिंह टिकैत का अंतिम संस्कार आज भाकियू की राजधानी सिसौली में किया गया। उनके ज्येष्ठ पुत्र नरेश टिकैत ने उनकी चिता को मुखाग्रि दी। उन्हें श्रृद्धांजलि देने के लिए भाजपा उपाध्यक्ष कलराज मिश्र व प्रदेश अध्यक्ष सूर्यप्रताप शाही सिसौली पहुंचे थे। इनके अलावा केन्द्रीय मंत्री प्रदीप जैन आदित्य, हरीश रावत, हरियाणा के मुख्यमंत्री भूपेन्द्र सिंह हुड्डा, उत्तर प्रदेश के कृषि मंत्री लक्ष्मी नारायण चौधरी, सांसद जगदम्बिका पाल, पूर्व मंत्री बाबू हुकुम सिंह, पूर्व मंत्री वीरेन्द्र सिंह, पूर्व सांसद अनुराधा चौधरी, सांसद संजय चौहान, पूर्व मंत्री किरणपाल सिंह अगौता, पूर्व मंत्री चितरंजन स्वरूप, पूर्व सांसद हरपाल सिंह पंवार, पूर्व सांसद हरेन्द्र मलिक, पूर्व सांसद स्वामी ओमवेश, सपा नेता आजम खां, रालोद जिलाध्यक्ष धर्मवीर सिंह बालियान, जिला बार संघ अध्यक्ष ठा. अनूप सिंह, जिला पंचायत के पूर्व अध्यक्ष तिरसपाल सिंह मलिक समेत दर्जनों वीआईपी व देश-प्रदेश के लाखों किसान मौजूद रहे।
देश खाप के चौधरी सुरेन्द्र सिंह, गठवाला खाप के चौधरी हरिकिशन सिंह मलिक, चौ. सीताराम बहावडी, बत्तीसा खाप के चौधरी सूरजमल, किसान नेता युद्धवीर सिंह आदि भी चौ. टिकैत की अंतिम यात्रा में मौजूद रहे। अपने प्रिय नेता के अन्तिम दर्शनों का जन सैलाब उमड पडा। प्रशासन के साथ-साथ भाकियू कार्यकर्ताओं को भी व्यवस्था बनाने में काफी मशक्कत करनी पडी। चौ. महेन्द्र सिंह की टिकैत की अन्तिम इच्छा के अनुसार उनका अन्तिम संस्कार सिसौली स्थित किसान भवन के परिसर में ही किया गया।

ज्ञात हो कि भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय अध्यक्ष व किसान मसीहा के रूप में विख्यात चौ. महेन्द्र सिंह टिकैत का कल निधन हो गया था, वे 76 वर्ष के थे। उन्होंने कल प्रात: 7.2० बजे अपने पुत्र चौ. राकेश टिकैत के मुजफ्फरनगर स्थित आवास पर अन्तिम सांस ली। वे लीवर के कैंसर से पीडित थे, उनका लंबे समय से विभिन्न अस्पतालों में ईलाज चल रहा था लेकिन अब सभी डाक्टरों ने जवाब दे दिया था। वर्तमान में बाबा टिकैत का आयुर्वेदिक दवाईयों से उपचार किया जा रहा था।

Mahendra Singh Tikait cremated



Farmer leader and BKU chief Mahendra Singh Tikait, was on Monday cremated at his birth place Sisauli near Muzaffarnagar in UP.

The body of farmer leader and BKU chief Mahendra Singh Tikait, who died after prolonged battle with bone cancer, was on Monday cremated at his birth place Sisauli near Muzaffarnagar in UP.

The last rites were performed in accordance with Hindu tradition by Tikait's eldest son Naresh who lit the pyre at the Bharatiya Kisan Union headquarters. The cremation was attended by scores of political leaders including Haryana Chief Minister Bhupinder Singh Hooda.

Tikait, who spearheaded many a struggle uniting peasants in north India, died yesterday due to bone cancer at the age of 76. He was suffering from the disease since last year and breathed his last at the residence of his son and BKU General Secretary Rakesh Tikait here.

Besides hundreds of farmers, Uttar Pradesh Agriculture Minister Chaudhary Laxmi Narayan, Samajwadi Party leader Azam Khan and other political leaders attended Tikait's funeral.



किसानों के मसीहा बाबा टिकैत नहीं रहे

किसानों के मसीहा बाबा टिकैत नहीं रहे
मुजफ्फरनगर, जागरण कार्यालय : किसानों के मसीहा चौधरी महेंद्र सिंह टिकैत नहीं रहे। उन्होंने रविवार सुबह करीब सात बजे मुजफ्फरनगर स्थित आवास पर अंतिम सांस ली। वह पिछले दो साल से कैंसर से पीडि़त थे। शाम को उनका पार्थिव शरीर पैतृक गांव सिसौली ले जाकर किसान भवन में अंतिम दर्शन के लिए रखा गया। सोमवार शाम चार बजे सिसौली में ही उनका अंतिम संस्कार होगा। उनके निधन से हर तरफ शोक की लहर है। उनके आवास पर दिनभर लोगों का तांता लगा रहा। परिजनों ने बताया कि वह पिछले दो साल से कैंसर और लीवर की बीमारी से जूझ रहे थे। डाक्टरों ने हाथ खड़े कर दिए थे। उन्होंने 26 दिन से खाना नहीं खाया था। तरल पदार्थ ले रहे थे। इन दिनों बाबा अपने बेटे राकेश टिकैत के मुजफ्फरनगर के संतोष विहार स्थित आवास पर रह रहे थे। शनिवार देर शाम से ही उनकी हालत गंभीर हो चली थी। देर रात बेहोशी में वह बड़बड़ाने लगे थे। रविवार सुबह सात बजे उन्हें सांस लेने में मुश्किल हुई तो करवट दिलाने को कहा, परिवार के सदस्यों ने करवट बदल दी। दो मिनट तक बोले और परिजनों को पहचाना भी। कुछ क्षण बाद उनकी आवाज बंद हो गई। ठीक 7 बजकर 08 मिनट पर उन्होंने अंतिम सांस ली। उनके निधन की खबर मिलते ही हर तरफ शोक की लहर व्याप्त हो गई। आवास पर लोगों का तांता लग गया। मध्य प्रदेश के राज्यपाल बलराम जाखड़, सांसद कादिर राना, भाजपा विधायक हुकुम सिंह, पूर्व सांसद हरेंद्र मलिक, स्वामी ओमवेश, रालोद नेत्री अनुराधा चौधरी, मंत्री यशवंत सिंह, विधायक शाहनवाज राना, पंकज मलिक, एमएलसी नसीब पठान, पूर्व मंत्री वीरेंद्र सिंह ने पहुंचकर उन्हें श्रद्धांजलि दी। डीएम पंकज कुमार व एसएसपी प्रवीण कुमार शाम को सिसौली के किसान भवन पहुंचे। दोनों अधिकारियों ने मुख्यमंत्री मायावती की ओर से चौधरी महेंद्र सिंह टिकैत के पार्थिव शरीर पर पुष्पचक्र अर्पित कर श्रद्धांजलि दी। कैबिनेट सचिव शशांक शेखर की ओर से एसएसपी प्रवीण कुमार ने पुष्पचक्र अर्पित किया।

Sunday, May 15, 2011

किसानों की लाठी

उन्होंने देश के तमाम हिस्सों में किसान आंदोलनों का नेतृत्व किया


महेंद्र सिंह टिकैत के जाने से भारतीय किसान आंदोलन में जो एक विराट शून्य पैदा हुआ है, उसकी भरपाई मुश्किल है। वह आंदोलन का दूसरा नाम थे। उन्होंने अपने आंदोलन की शुरुआत बढ़ी हुई बिजली दरों के खिलाफ की थी। 27 जनवरी, 1987 को मुजफ्फनगर जिले में करमूखेड़ी के बिजलीघर पर किसानों का धरना शुरू हुआ था। पीएसी द्वारा रोके जाने पर किसान उत्तेजित हो गए। परिणामस्वरूप पुलिस की गोलीबारी में दो किसानों की मौत हो गई। पीएसी का एक जवान भी मारा गया। पहली या दूसरी अप्रैल को भारतीय किसान यूनियन के अध्यक्ष टिकैत ने फिर करमूखेड़ी बिजलीघर को घेरकर धरना दिया।

अधिकारियों के आश्वासन पर वह धरना समाप्त हुआ। लेकिन पूरे प्रदेश में इस आंदोलन का व्यापक असर हुआ। सरकार की ओर से पहली बार किसानों की समस्या का समाधान करने के गंभीर प्रयासों का आभास मिला। भारतीय किसान यूनियन की ओर से जिलाधिकारी को दिए गए 11 सूत्रीय मांगों पर ठीक से विचार किया गया। बिजली की बढ़ी हुई दरों और लंबित बिजली पर लगाई गई दंड राशि आदि माफ करने पर समझौता हुआ।

करमूखेड़ी के बाद तो टिकैत किसानों की अस्मिता के प्रतीक ही बन गए। मेरठ, रजबपुर (मुरादाबाद), खैर (अलीगढ़), दिल्ली का वोट क्लब, भोपा (मुजफ्फरनगर), गाजियाबाद, चिनहट (लखनऊ), रामकोला (गोरखपुर), मुंबई, राजस्थान, हरियाणा, कर्नाटक, तमिलनाडु सहित प्राय: देश के सभी इलाकों में किसानों के हित में उन्होंने आंदोलनों का नेतृत्व किया।शुरुआती दिनों में लोग उन पर कटाक्ष भी करते। लेकिन इससे उनकी प्रतिबद्धता में कहीं कोई कमी नहीं आई। उन्होंने आजीवन सादा जीवन जीया। शुद्ध शाकाहारी भोजन करते और दिखावे से कोसों दूर थे। वही मोटा हाथ का बुना गाढ़े (देसी खद्दर) का कुरता, धोती और सिर पर सादी गांधी टोपी। ठेठ पश्चिमी उत्तर प्रदेश की खड़ी बोली में ही वार्तालाप करते और उसी में धड़ल्ले से भाषण भी देते। मंच चाहे देश में हो या विदेश में, गांव में हो या शहर में, अशिक्षित-अर्द्धशिक्षित किसानों का हो या उच्च शिक्षित विद्वानों का, उन्हें कोई फर्क नहीं पड़ता था। धीरे-धीरे किसान नेता के तौर पर महेंद्र सिंह टिकैत का नाम प्रसिद्ध हो गया। देश भर के किसानों के लिए तो यह नाम जादुई संगीत बन गया। किसान ही नहीं, दूसरे वर्गों की समस्याओं पर भी टिकैत की टिप्पणी वजन रखने लगी थी।

करमूखेड़ी की घटना से पहले 17 अक्तूबर, 1986 को महेंद्र सिंह टिकैत भारतीय किसान यूनियन की स्थापना मुजफ्फरनगर जिले के अपने पैतृक गांव सिसौली में कर चुकेथे। इसी गांव में 1935 में उनका जन्म एक जाट परिवार में हुआ था। उनके पिता चौहल सिंह का 1943 में निधन हो गया। उनका परिवार उस सर्वखाप पंचायत से जुड़ा हुआ था, जिसका पुराने जमाने से उत्तर भारत में दबदबा था। दरअसल जिस पंचायती राज की बात आज जोर-शोर से की जाती है, वह पंचायत प्रणाली अपने देश में सदियों से मौजूद रही है।

इस संदर्भ में एक विशेष घटना का उल्लेख करना आवश्यक प्रतीत होता है। वर्ष 1949 या 1950 में मुजफ्फरनगर केही सिसौली जितने प्रसिद्ध और लगभग उतनी ही आबादी वाले जाट बहुल गांव सोरम के एक पुराने मकान से तकरीबन 40-50 किलोग्राम वजन के कागजात पुराने बक्सों में बंद मिले। यह परिसर चौधरी कबूल सिंह का था। उन दस्तावेजों की जांच-पड़ताल करने पर पता चला कि वे सर्वखाप पंचायत के रिकॉर्ड थे। जिस घर में वे पाए गए थे, वह परिवार कई पीढ़ियों से उस सर्वखाप पंचायत का मंत्री भी रहा था। चौधरी कबूल सिंह उसी परंपरा में उस परिवार के मुखिया होने के नाते मंत्री थे। यह कागजात लेकर वह आर्य समाज के प्रसिद्ध नेता और संस्कृत के जाने-माने विद्वान जगदेव सिंह सिद्धांती के पास आए। सिद्धांती जी उस समय पश्चिमी उत्तर प्रदेश ही नहीं, पूरे उत्तर भारत में गुरुकुल शिक्षा पद्धति और समाज सुधार अभियान के कारण ख्याति प्राप्त कर चुकेथे। मेरे पिता रघुवीर सिंह शास्त्री उनके शिष्य भी थे और सहयोगी भी। ये दोनों दिल्ली से

सम्राट

नाम से समाचार पत्र प्रकाशित करते थे। उसी अखबार में मंत्री कबूल सिंह ने सर्वखाप पंचायत के इन ऐतिहासिक दस्तावेजों को प्रकाशित कराया। इन्हीं दस्तावेजों के आधार पर उस्मानिया विश्वविद्यालय के राजनीतिशास्त्र विभाग के अध्यक्ष प्रोफेसर एमसी प्रधान की एक शोधपूर्ण पुस्तक-

उत्तर भारत की जातियों की गणराज्यीय राजनीतिक व्यवस्था

-ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी प्रेस ने प्रकाशित की। इस पुस्तक और अन्य शोधकार्यों के दौरान पता चला कि जिस सर्वखाप का मंत्री सोरम गांव में है, उसका अध्यक्ष या प्रधान तो सिसौली गांव में है। खोजने पर ज्ञात हुआ कि यह वही परिवार है, जहां महेंद्र सिंह टिकैत का जन्म हुआ था। पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कतिपय अग्रणी व्यक्तियों ने निश्चय किया कि इस प्राचीन परंपरा को पुनर्जीवित किया जाए। वर्ष 1954 या 1955 में इन लोगों की पहल पर एक विशाल सर्वखाप पंचायत का आयोजन दीपावली के दिन किया गया। सिसौली की उस महापंचायत में वैदिक पद्धति से सामूहिक यज्ञ केबाद सार्वजनिक सभा हुई। उसमें लगभग एक लाख लोगों की उपस्थिति में स्वर्गीय चौहल सिंह के 19 वर्षीय पुत्र महेंद्र सिंह के सिर पर हल्दी चंदन का टीका लगाया गया था। कहने का अर्थ यह कि नेतृत्व तो उन्हें विरासत में ही मिला था।

नहीं रहे किसान नेता महेंद्र सिंह टिकैत

रविवार सुबह बाबा ने ली अंतिम सांस


नहीं रहे किसान नेता महेंद्र सिंह टिकैत

मुजफ्फरनगर। मृत्यु शैया पर भी युद्ध सी ललकार वाली आवाज खामोश हो गई है। सिसौली सूनी हो गई। किसानों का सच्चा हमदर्द दुनिया से विदा हो गया। भाकियू मुखिया और बालियान खाप के चौधरी महेंद्र सिंह टिकैत नहीं रहे। जानलेवा बीमारी कैंसर से लड़ते हुए रविवार तड़के उन्होंने अंतिम सांस ली।

देश के शीर्ष किसान नेता एवं भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय अध्यक्ष चौधरी महेन्द्र सिंह टिकैत का 76 वर्ष की आयु में रविवार को लंबी बीमारी के बाद मुजफ्फरनगर में निधन हो गया। वह हड्डी के कैंसर से पीड़ित थे। अपने महानायक के निधन से किसान स्तब्ध हैं। बाबा टिकैत इससे पहले भी दो बार गंभीर रूप से बीमार पड़े पर अपनी हठ से हर बात मनवाने वाले टिकैत ने बीमारी को दोनों दफा हरा दिया। लेकिन अबकी किसान नेता ने लगता है हामी भर दी।

भाकियू के राष्ट्रीय प्रवक्ता और उनके पुत्र राकेश टिकैत ने बताया कि स्व टिकैत की अंत्येष्टि सोमवार को उनके पैतृक गांव सिसौली में किसान भवन में शाम चार बजे होगी। उन्हें श्रद्धांजलि देने के लिए किसानों, राजनीतिज्ञों और किसान संगठनों के पदाधिकारियों का तांता लगा है। उनके निधन का समाचार फैलते ही शोक की लहर दौड़ गई और लोग उनके अंतिम दर्शन के लिए उमड़ने लगे।

पिछले 25 सालों से देश में किसान संघर्ष का प्रतीक बन गए चौधरी टिकैत ने मुजफ्फरनगर में सरकुलर रोड स्थित ऋषभ विहार में अपने आवास पर सुबह 7 बजकर 10 मिनट पर अंतिम सांस ली। टिकैत दो साल से बोन कैंसर से जूझ रहे थे।

शनिवार को उनकी तबीयत अधिक खराब हो गई। पौत्र गौरव टिकैत के मुताबिक बाबा ने सुबह उनके साथ बातचीत की तो लगा कि सेहत में सुधार है। लेकिन कुछ पल बाद ही वह अनंत में लीन हो गए। वह बालियान खाप के मुखिया भी थे। अब मुखिया की पगड़ी उनके पुत्र नरेश टिकैत को पहनाई जाएगी।

PM, Sonia condole Tikait's death





BKU leader Mahendra Singh Tikait dead; PM, Sonia condole deathPosted on: 16 May 2011, 12:16 AM




Muzaffarnagar/ New Delhi: Mahendra Singh Tikait, a prominent leader of farmers from prosperous western Uttar Pradesh who spearheaded many movements in north India, died on Sunday due to bone cancer.



76-year-old Tikait, who headed the Bharatiya Kisan Union, had been suffering from bone cancer since last year and breathed his last at the residence of his son and BKU General

Secretary Rakesh Tikait here, family sources said.



Tikait leaves behind four sons and two daughters. His wife had died earlier.



A large number of people gathered here to pay tributes to the farmer leader. The cremation would be held tomorrow at BKU headquarters in Sisauli.



A popular leader among farmers, Tikait had led a number of mass movements against the state and central governments to support the rights of the farmers.



The BKU had in 1988 laid a virtual siege to Meerut in pursuit of higher prices for sugarcane, cancellation of loans and lowering of water and electricity rates. The same year he had organised a week-long protest in Delhi's Boat Club to focus on the plight of farmers.



Tikait courted controversy in 2008 when he was arrested and later released on bail for allegedly making derogatory and caste-based remarks against Mayawati.



He was arrested several times during his agitations, the latest being in February 2000 in Moradabad while on his way to hold a panchayat in Lucknow.



Born in 1935 at Sisauli in Muzaffarnagar district, Tikait, a Jat, inherited the leadership of Baliyan Khap at the age of eight.



PM, Sonia condole Tikait's death


Prime Minister Manmohan Singh on Sunday condoled the death of BKU leader Mahendra Singh Tikait, saying he was a unique leader who will be "deeply missed" in the years ahead.

In his condolence message to Tikait's elder son Narendra Pal Tikait, Singh said, "Chaudhury Tikait's commitment to the welfare of farmers and to rural India was deep and unwavering."

"His work was a powerful influence across the country and inspired the formation of many other organisations devoted to the cause of farmers," he said.

Describing Tikait as a "fiercely independent" person, Prime Minister said "he resisted the pull of politics all his life. His work, his courage of conviction and his simplicity made him a unique leader."

Meanwhile, Congress President Sonia Gandhi also condoled the death of Tikait.

In Lucknow, Chief Minister said, "Tikait worked throughout the life in the interest of farmers and fought for their cause. His works will always be remembered."

Meanwhile, JD(U) leader Sharad Yadav said the death of Tikait is a loss which cannot be compensated.

"Tikait was a symbol of relentless struggle against farmers exploitation. True homage to him will be stopping the ongoing loot of farmers land in Uttar Pradesh," Yadav said in his condolence message.

Former BJP president Rajnath Singh said Tikait dedicated his life for the welfare of farmers.

BJP President Nitin Gadkari in his condolence message recalled that the BKU chief was instrumental in launching several mass kisan movements against the anti-farmer policies

of the Central government and in support of the rightful demands of the farmers in different states.

Uttarakhand Chief Minister Ramesh Pokhriyal Nishank expressed grief over Tikait's death.

In a message, Nishank described him as a great social leader and said he devoted his full life for the cause of farmers and the country would always remember him.

Haryana Chief Minister Bhupinder Singh Hooda said Tikait worked selflessly for the cause of the farmers.

"He formed a non-political organisation--Bhartiya Kisan Union--and led a number of rural agitations and farmers' movements to safeguard the interest of the peasantry. In his death the farmers have lost their well-wisher," Hooda said in his condolence message.



Sharad Pawar condoles passing away of farmers’ leader Tikait








Sharad Pawar condoles passing away of farmers’ leader Tikait


New Delhi, May 15: Union Agriculture Sharad Pawar has condoled the demise of Bharatiya Kisan Union President Mahendra Singh Tikait, who spearheaded several movements for peasants' rights in northern India.

In his condolence message, Pawar said: "I have learnt with shock and grief about the demise of Mahendra Singh Tikait. The interests of the farming community were close to the heart of the popular kisan leader and he always stood with the farmers on all issues concerning them."

"We will be deprived of his valuable advice and views on matters relating to agriculture. I pray to the almighty to give peace to the departed soul and give strength to his family to bear the irreparable loss," he added.

Tikait, who also served as the council head of Baliyan Khap, died in Muzaffarnagar this morning due to protracted illness.

His cremation will be held at the BKU headquarters in Sisauli on Monday

Tikait, a farmers' leader who mastered the art of mass protests (Obituary)

Tikait, a farmers' leader who mastered the art of mass protests (Obituary)

View Source: Indo Asian News Servie
New Delhi, May 15 (IANS) In October 1988, Delhi got a taste of farmers' fury. Mahendra Singh Tikait led thousands of farmers to the heart of the Indian capital and brought the city to a halt for a week.

Tikait, who died Sunday at the age of 76, hit the headlines after the Delhi protest. He succeded in highlighting the plight of farmers, who suffered as agriculture itself became unprofitable.

Tikait mastered the art of mass protests and founded the Bharatiya Kisan Union (BKU).

Delhi protest's inspiration came from his earlier 24-day siege of Meerut city in Uttar Pradesh in 1987 seeking higher prices for sugarcane, cancellation of loans and lowering of water and electricity rates.

But the two longest of his 'satyagrahas' came in 1988 when he led a 110-day protest in Rajabpur in Uttar Pradesh that led to police opening fire to disperse the farmers on rail tracks and putting up road blockages.

In 1992, he led thousands to a 77-day protest in Ghaziabad demanding more compensation for land.
Again in 1992, Tikait reached state capital Lucknow with over 200,000 farmers to warn the Uttar Pradesh government to concede the farmers' demand for higher sugarcane price together with heavy rebates in electricity dues.


The Janata Dal government buckled and agreed to bulk of the demands.

In his lifetime, the septuagenarian had led at least 20 mass protests and movements against state and central governments to seek a better life for the farmers of north India and was arrested 10 times.

Even if the Jat leader was not in BKU, he would still have been a leader in his own right, having inherited the chieftainship of Baliyan Khap (a community association) as its 'choudhary' (leader) at the age of eight.

Tikait was born in 1935 at Sisauli village in Muzaffarnagar district of Uttar Pradesh.

Tikait was a title his family was conferred with by Raja Harshavardhana, the ruler of Thanesar, in the seventh century.

The mass leader also courted controversies during his later years.

He was arrested, but released on bail, for allegedly making derogatory remarks against Uttar Pradesh Chief Minister Mayawati in 2008.

It took a contingent of 6,000 armed policemen to lay a siege around his village to arrest him. He later tendered an apology.

Before getting slowed down by disease and old age, his last formidable show of strength came in 2008, when he opposed marriages among same 'gotra' (sub-caste).


He had the support of the farmer community, largely dominated by Jats in western Uttar Pradesh and still deeply wedded to their medieval social tradition of not allowing marriages within the same gotra.

And Tikait rose up to even oppose the Supreme Court for holding such marriages valid.

'We live by a moral code where honour has to be protected at any cost. Same-gotra marriages are incestuous, No society would accept it. Why do you expect us to do so? Incest violates 'maryada' (honour) and villagers would kill or be killed to protect their maryada,' he said in a TV interview.

Tikait, as choudhary of the Baliyan Khap, declared that 'love marriages are dirty...only whores can choose their partners'.

Bharatiya Janata Party (BJP) president Nitin Gadkari and Delhi Chief Minister Sheila Dikshit Sunday condoled the death of prominent farmer's leader Mahendra Singh Tikait

 New Delhi, May 15


Bharatiya Janata Party (BJP) president Nitin Gadkari and Delhi Chief Minister Sheila Dikshit Sunday condoled the death of prominent farmer's leader Mahendra Singh Tikait.

In a statement, Gadkari said: “We express profound grief and sorrow on the sad demise of the renowned kisan leader Shri Mahendra Singh Tikait.”

"It is a deep loss to the farmer community," Dikshit said, according to a statement from the chief minister's office.

Tikait, founder president of Bharatiya Kisan Union (BKU), died in Muzaffarnagar in Uttar Pradesh Sunday morning. He was 76.

Born Oct 6, 1935, Mahendra Singh Tikait emerged as a powerful farmer leader in the agriculturally rich western Uttar Pradesh in 1987 when he raised his voice for the cause of sugarcane growers.

His last formidable show of strength came in 2010, when he staged a massive panchayat in Muzaffarnagar to oppose moves in favour of intra-gotra (sub-caste) marriages

Nitish Kumar condoles Mahendra Singh Tikait's death

Bihar chief minister Nitish Kumar today expressed profound grief at the death of the Bharatiya Kisan Union (BKU) leader Mahendra Singh Tikait and said he would be remembered as a crusader for farmers rights.

In a condolence message, Kumar said that Tikait was a reputed farmers leader as he was always pro-active to take up the cause of the farmers and speak for their rights.

76-year-old Tikait died due to bone cancer at his son's residence Uttar Pradesh's Muzaffarnagar district.



Mahendra Singh Tikait dead






 Mahendra Singh Tikait dead


state politics

Farmer leader Mahendra Singh Tikait, who spearheaded several movements for peasants’ rights in northern India, died on Sunday due to bone cancer.

Mr. Tikait (76), who was president of Bharatiya Kisan Union, had been suffering from bone cancer since last year and breathed his last at the residence of his son and BKU General Secretary Rakesh Tikait here, family sources said.

He is survived by four sons and two daughters. His wife had died earlier.

A large number of people gathered here to pay tributes to the farmer leader. The cremation would be held tomorrow at BKU headquarters in Sisauli.

A popular leader among farmers, Mr. Tikait had led a number of mass kisan movements against the state and central governments to support the rights of the farmers.

The BKU had in 1988 laid a virtual siege of Meerut in pursuit of higher prices for sugarcane, cancellation of loans and lowering of water and electricity rates. That same year he had organised a week-long protest in Delhi’s Boat Club to focus on the plight of farmers.



Mr. Tikait courted controversy in 2008 when he was arrested and later released on bail for allegedly making derogatory and caste based remarks against Chief Minister Mayawati.

Mr. Tikait was arrested several times during his farmers’ agitations and the latest being in February 2000 in Moradabad while on his way to hold a panchayat in Lucknow.

Born on in 1935 at Sisauli in this district, Mr. Tikait, a Jat, inherited the leadership of Baliyan Khap at the age of 8.



PM condoles Tikait's death

Prime Minister Manmohan Singh on Sunday condoled the death of BKU leader Mahendra Singh Tikait, saying he was a unique leader who will be "deeply missed" in the years ahead. In his condolence message to Tikait's elder son Narendra Pal Tikait, Singh said: "Chaudhury Tikait's commitment to the welfare of farmers and to rural India was deep and unwavering."

"His work was a powerful influence across the country and inspired the formation of many other organisations devoted to the cause of farmers," he said.
Describing Tikait as a "fiercely independent" person, prime minister said "he resisted the pull of politics all his life. His work, his courage of conviction and his simplicity made him a unique leader."
In Lucknow, chief minister said: "Tikait worked through out the life in the interest of farmers and fought for their cause. His works will always be remembered."
Meanwhile, JD(U) leader Sharad Yadav said the death of Tikait is a loss which cannot be compensated.

"Tikait was a symbol of relentless struggle against farmers exploitation. True homage to him will be stopping the ongoing loot of farmers land in Uttar Pradesh," Yadav said in his condolence message.
Former BJP president Rajnath Singh said Tikait dedicated his life for the welfare of farmers.

"He was free from all stigma of corruption and he lived a simple life. We have lost a true friend of farmers," he said.



Death of Mahendra Singh Tikait




Death of Mahendra Singh Tikait


We are deeply saddened to inform you that Ch Mahendra Singh Tikait, leader of the Bhartiya Kisan Union died at 7 am today [Sunday, May 15th 2011] in his home town of Muzzafarnagar in Uttar Pradesh. He died after a prolonged battle with bone cancer.

His cremation rites will be performed at 4 PM at the Kisan Bhawan in village Sisauli, District Muzzafarnagar in Uttar Pradesh tomorrow on 16th May 2011.

He is survived by four sons and two daughters. His death is grieved by farmers across the country who he inspired greatly in their struggle for justice and dignity.

Saturday, May 14, 2011

Bharatiya Kisan Union President Mahendra Singh Tikait died in Muzaffarnagar on May 15, 2011




Mahendra Singh Tikait was a popular Indian leader of farmer's from Western Uttar Pradesh in India. He was born in 1935 at village Sisauli in Muzaffarnagar District of Uttar Pradesh. Bharatiya Kisan Union President Mahendra Singh Tikait died in Muzaffarnagar on May 15, 2011, Uttar Pradesh due to protracted illness from cancer. He was 76. India. He was a Jat of Raghuvanshi gotra andChoudhary of Balyan Khap.

He was a farmer leader and President of Bharatiya Kisan Union. He led a number of mass Kisan movements against the state and central governments in India to support the rights of the farmers. He led many international delegations with him around the globe. The character of Kisan movements since the 1970s has been a matter of considerable debate. Bhartiya Kisan Union(BKU)worked in close cooperation with international organizations like La Via Campesina,Farmers Coordination Committee India etc.

The BKU received national attention in 1988, when its supporters organised a virtual siege in Meerut in pursuit of higher prices for Sugarcane, cancellation of loans and lowering of water and electricity rates.

In 2006, around one lakh (100,000)farmers gathered in Mumbai during heavy rains to protest against Government's WTO and anti-farmers policies.A memorandum addressed to Prime Minister Manmohan Singh was released urging to keep agriculture out of WTO. Mahendra Singh Tikait, president of BKU said " It does not matter how much it rains here. We will not stop our fight. The Government will have to hear us. We need a change of Policies
Mahendra Singh Tikait, the BKU Chaudhary ('Headman') was born in 1935 at village Sisauli in Muzaffarnagar of Uttar Pradesh. Ch. Mahendra Singh Tiakait inherited the Chaudharyship of the Khap Baliyan at the age of eight when his father Ch.Chauhal Singh died in 1943.The Chaudharyship of the Baliyan khap had been vesting in his family for the last thirteen centuries. The chaudharyship of a khap panchayat is a hereditary position. The Chaudahry enjoys administrative, adjucative and executive powers over the khap villages. The chaudhary is held in high esteem and his decisions are binding on his people. At a panchayat meeting of the khap Baliyan held at Sisauli on May 12,1941, a resolution was passed which said : " We will work with our body, hear and soul under the leadership of our Chaudhary for the good of our Khap. Towards this end the Chaudhary of a khap has the right even to demand our lives." Thus the Chaudahry of a khap panchayat enjoys supreme powers.
After the death of former Prime Minsiter late Ch.Charan Singh in western U.P. he was called the second 'messiah' of kisans. On 17th October,1986 he formed a non-political orgarnisation named 'Bhartiya Kisan Union' to protect the interests of all the farmers of India whose are 80 percent of the population of the country. In this way he headed so many movements and as a result of these agitations,many times, he was arrested and sent to jail, yet he is on the way to protect the interest of all the kisans of India.



पुलिस लाइन में ही कर डाली सभा

पुलिस लाइन में ही कर डाली सभा


राकेश टिकैत समेत 142 किसानों को शांति भंग की आशंका में गिरफ्तार किया गया था। शाम को एसीएम के यहां से जमानत पर रिहा कर दिया गया। सभी किसान घरों को लौट गए हैं।



पुलिस लाइन में हिरासत में रखे गए किसानों ने वहीं सभा कर डाली।

एसपी से लेकर सिपाही तक को फटकारा

गए।


एसपी से लेकर सिपाही तक को फटकारा

मेरठ।

राकेश टिकैत की गिरफ्तारी के बाद डीआईजी प्रेम प्रकाश और डीएम अनिल गर्ग पुलिस लाइन पहुंचे। डीआईजी ने सुरक्षा बंदोबस्त बेहद लचर देखे तो सार्वजनिक रूप से अफसरों और कर्मचारियों पर बरस पड़े। जिस बहुउद्देशीय हाल में किसानों को हिरासत में लेकर बैठाया हुआ था, वहां के दोनों गेट खुले थे। पुलिस कर्मचारी एक साइड में खड़े थे। डीआईजी ने सुरक्षा बंदोबस्त नहीं करने पर पहले एसपी सिटी को सबके सामने खूब हड़काया। गुंडा दमन दल के सदस्यों को काफी कड़े शब्दों को इस्तेमाल कर भंग करने तक की चेतावनी दे डाली। एक प्रशिक्षु अफसर को खुद के सामने मोबाइल पर बात करने पर बेहद नाराजगी जताई।

पुलिस की पिच पर किसानों के बाउंसर

पुलिस की पिच पर किसानों के बाउंसर


राकेश
टिकैत ने पुलिस लाइन में ही हिरासत के दौरान सभा कर डाली। पुलिस वालों को किसानों पर हत्या करने का आरोप लगाया। कहा कि किसान की जमीन सरकार को जबरन नहीं दी जाएगी।

चंद्रपाल फौजी के संचालन में बहुउद्देशीय हाल में सभा की गई। जिस मंच पर सिर्फ पुलिस और प्रशासन के अफसर कर्मचारियों और अफसरों को संबोधित करते हैं आज वहां किसानों का कब्जा था। मंच पर किसान दरी डालकर डेरा जमाए रहे। सभा के एलान पर एक बार अफसरों में हलचल पैदा हुई, लेकिन टकराव नहीं हो, इसके लिए हाथ खींच लिया। सभा में सरकार, अफसर निशाने पर रहे। भाकियू और चौधरी महेंद्र सिंह टिकैत जिंदाबाद के तेज आवाज से नारे लगाते रहे। भाकियू ने किसान विरोधी सरकार को बर्खास्त करने की मांग की। किसानों के लिए पानी बगैरा का खासी व्यवस्था पुलिस ने की। दोपहर में खाना मांगने पर बाजार से पैकेट मंगाकर दिए गए।

भट्टा की तपिश से तमतमाए टिकैत

भट्टा की तपिश से तमतमाए टिकैत


राकेश टिकैत के काफिले ने तोड़ा पुलिस का बैरियर, पुलिस से नोकझोंक; डीआईजी-डीएम को करनी पड़ी गिरफ्तारी

मेरठ।

नोएडा के भट्टा पारसौल गांव के लिए कूच करते भाकियू नेता राकेश टिकैत को गिरफ्तार करने के लिए पुलिस को नाकों चने चबाने पड़े। किसान तीन जगह पुलिस की बाधा को लांघकर, गंगानगर पुलिस चौकी का बैरियर तोड़कर आगे बढ़ गए। आखिरकार खुद डीआईजी और डीएम ने उन्हें गिरफ्तार किया।

गुरुवार सुबह राकेश टिकैत और भाकियू पश्चिमी उप्र के अध्यक्ष चंद्रपाल फौजी ने नोएडा कूच का ऐलान किया था। राकेश टिकैत समर्थकों के साथ नोएडा चल दिए। अफसरों का कहना था कि किसी भी हालत में टिकैत को नहीं जाने दिया जाएगा। रोकने के लिए पहले से ही नाकेबंदी कर रखी थी, मगर मसूरी, इंचौली पर किसान रोके नहीं रुके। गंगानगर पुलिस चौकी पर पुलिस वालों को धकियाकर, बैरियर तोड़कर निकल भागे। राकेश टिकैत, कार्यकर्ताओं की गुंडा दमन दल और पुलिस वालों से झड़प हुई। राकेश के नोएडा कूच करने का मैसेज वायरलेस पर गूंज उठा। उसके बाद रास्ते में उन्हें डीएम अनिल गर्ग, डीआईजी प्रेम प्रकाश ने रोककर गिरफ्तारी का आदेश सुना दिया। सभी को पूरे दिन पुलिस लाइन में रखा गया, शाम को छोड़ दिया गया।

भाकियू का धरना शुरू

भाकियू का धरना शुरू


ग्रेटर नोएडा। भट्टा-पारसौल के किसानों की समस्याओं को लेकर भाकियू ने बृहस्पतिवार से धरना शुरू कर दिया। किसानों ने मांग की है कि तुंरत पुलिस हटाई जाए और जो किसानों की मांगे, हैं उनको हल किया जाएगा। संगठन के जिलाध्यक्ष अजयपाल शर्मा ने बताया कि किसानों की जो भी समस्याएं हैं उनके निराकरण के लिए धरना दे रहे हैं।

बस मुझे पांच दिन का समय दो: आईजी

बस


मुझे पांच दिन का समय दो: आईजी

बुलंदशहर। आईजी रजनीकांत मिश्रा शुक्रवार को भारतीय किसान यूनियन के पदाधिकारियों के साथ बातचीत में गिड़गिड़ाते नजर आए। उन्होंने कहा कि वे कटघरे में खड़े हैं। आप लोग धरना खत्म कर दो और गांवों से पलायन कर चुके किसानों को वापस बुलवा लो। वार्ता में किसान नेता उनकी बातों से नहीं पिघले। किसान नेताओं ने दो टूक कहा कि गांवों से पुलिस फोर्स हटाओ और शासन से किसानों की बातचीत कराओ। सब कुछ सामान्य हो जाएगा। आईजी ने कहा कि आज तो यह संभव नहीं है, मगर मुझे पांच दिन का समय दो।

आई सुबह करीब दस बजे पारसौल रजवाहे पर पहुंचे। वहां उन्होंने भाकियू के महासचिव राजपाल शर्मा, प्रांतीय उपाध्यक्ष महेंद्र सिंह, राजवीर सिंह, हरपाल सिंह, अजय और अन्य किसान नेताओं को बातचीत के लिए बुलाया। वार्ता में उन्होंने मीडिया को बाहर रखा। अमर उजाला टीम ने वार्ता को कैमरे में कैद किया और बातचीत के पूरे अंश सुने।

मिश्रा ने कहा कि मैं किसानों का सम्मान करता हूं। धारा 144 लागू होने के बावजूद भी मैंने किसानों को गिरफ्तार नहीं किया। जबकि अन्य सभी को गिरफ्तार किया है। अब आप लोग धरना समाप्त कर दीजिए। इस पर किसान नेता अड़ गए। राजपाल शर्मा ने कहा कि पहले क्षेत्र से पुलिस फोर्स हटाया जाए और शासन से किसानों की बातचीत कराई जाए। धरना तभी समाप्त होगा। मिश्रा ने किसानों से कहा कि देखिए मैं बीच में हूं, आप गांव वालों को वापस बुलाओ।

BKU leader Rakesh tikait arrested

source;http://articles.timesofindia.indiatimes.com/2011-05-12/india/29535557_1_bku-leader-arrest-mayawati-government
Senior BJP leaders, BKU leader arrested

May 12, 2011, 02.22pm IST

GHAZIABAD: Senior BJP leaders Rajnath Singh, Arun Jaitley and Mukhtar Abbas Naqvi were arrested here by the Uttar Pradesh Police when they were agitating in support of farmers of Greater Noida who want more compensation from the state government for their acquired land.The arrests evoked a strong reaction from the party which alleged that Uttar Pradesh was being run under a "dictatorship" and vowed to continue its protest "irrespective of repression".The BJP leaders were arrested on charge of breach of peace under section 151 CrPC and taken to the police lines in a police van in the district where prohibitory orders under Section 144 CrPC which do not allow assembly of four or more persons were already imposed.Rajnath Singh had started a 24-hour fast today at the Ambedkar park here to protest against atrocities on farmers by the UP government. Jaitley and Naqvi, along with some state unit leaders of BJP, had gathered to support him.After the arrest, Rajnath said wherever he is kept under detention, his fast would continue till 11am tomorrow. He alleged that there was utter lawlessness and rampant corruption in Uttar Pradesh under the BSP government.Earlier, the former UP chief minister said if a BJP government came to power it would form a commission to investigate all corruption cases against the Mayawati government."The situation in UP is such that even legitimate protest is prohibited. This is an intolerant government. Our protest will continue irrespective of repression," Jaitley told PTI after the arrest.Senior BJP leader Yashwant Sinha alleged that Mayawati was being dictatorial and acting like an "Ottoman ruler"."UP is being run like under a dictatorship. Sitting on a hunger strike for 24 hours is an absolutely assured democratic right. How can you arrest somebody not indulging in looting or rioting? Which law was broken that necessitated their arrest. I am absolutely shocked at the behaviour of the government," Sinha said.He maintained that it was the Mayawati government which had ordered firing on the agitating villagers."If the opposition goes there, you cannot find fault with them. It is our duty to reach out to the farmers in this hour of need," he said.The former union minister insisted Mayawati was acting in a "very unwise manner"."This is not the way this issue will be surpressed and if she does not allow expression of opposition then she is in for a great deal of trouble.... If she thinks she a ruler like the Ottoman king then she is completely mistaken," Sinha said.BJP spokesperson Prakash Javadekar maintained that both Congress and BSP were responsible for the present state of affairs.Meanwhile, senior Bharatiya Kisan Union (BKU) leader Rakesh Tikait was on Thursday arrested while he was on his way to the troubled Batta Parsaul area of Greater Noida to meet the agitating farmers.Tikait and 100 other BKU workers were arrested when they broke a police barrier in Ganga Nagar while on their way to Bhatta Parsaul in Greater Noida, DIG (Meerut) Prem Prakash said.Tikait, BKU's national spokesperson, and his associates were kept at the police line, Prakash added.Tikait said that they were going to the troubled area to help in restoration of normalcy in the region by talking with the agitating farmers.He said that BKU chief Mahendra Singh Tikait could not come personally as he was not well.Tension prevailed in Greater Noida following the death of four people, including farmers and polica, in police firing when the farmers' agitation demanding better compensation for land acquired for the Yamuna Expressway project turned violent.The entire issue has also gained political heat with the visit of Congress general secretary Rahul Gandhi who was arrested by police on Wednesday during his visit to the troubled Bhatta Parsaul region.

Monday, May 9, 2011

भटटा-पारसौलके हर घर में मातम राकेश टिकैत बोले, समाधान करो

जमीं पर धुआं, दिलों में आग


नेताजी बोले

संपादन एवं डिजाइनिंग, गुरदीप सिंह

भट्टा पारसौल (ग्रेटर नोएडा)। कल तक जहां रहती थी दिन-रात रौनक, वहां अब सिर्फ वीराना नजर आ रहा है। और सन्नाटे को चीर रहे हैं तो सिर्फ अफसरों की गाड़ियों के टायर या फोर्स के बूटों की आवाज। पूरी रात पुलिस-पीएसी ने गांव में जिस तरह से तलाशी अभियान चलाया था, डरी-सहमी महिलाओं की जुबान से उसकी सच्चाई फूट रही है मगर उसे मीडिया तक नहीं दिया जा रहा। गांव में न मर्द दिख रहे और न बच्चे। महिलाएं इतनी आतंकित हैं कि घरों से बाहर तक नहीं झांक रहीं। पुलिस-पीएसी और आरएएफ ने भट्टा पारसौल को चारों तरफ से सील कर रखा है। खेतों से निकलकर बाहर आए पड़ोसी गांव के हलवाई इमरान ने बताया कि पुलिस किसी को गांव की तरफ नहीं झांकने दे रही। जैसे, शनिवार के सच परदा डालने की कोशिश हो रही हो। सुबह कुछ देर को मीडिया की टीमें गांव में पहुंचने में सफल हो गई थी तो कुछ कड़वी बातें सुनने को मिलीं। एक महिला ने नाम न छापे जाने की शर्त पर बताया कि पुलिस और पीएसी ने महिलाओं और बच्चों के साथ बुरा बर्ताव किया। नई-नई ब्याह कर आई एक बहू के साथ भी मारपीट की। तोड़फोड़ और आगजनी तो न जाने कितनी जगहों पर की। पुलिसवाले बार-बार महिलाओं से उनके पतियों के नाम और उनके मोबाइल नंबर पूछ रहे थे। रात की कहानी गांव दूसरे दिन शाम तक बयां करता दिख रहा है।

हर हाथ में लाठी, हर हाथ में बंदूक, मनुहार को उठते रहे हाथ अब तंत्र के गिरेबान तक आ पहुंचे हैं, नोएडा से अलीगढ़, आगरा और मथुरा तक ‘अन्नदाता’ धधक रहे हैं, गम, गुबार, गुस्से की इस आंधी के अर्थ अब भी नहीं समझे गए तो आगे इसके अंजाम और भयानक हो सकते हैं, वक्त लाभ-हानि के विमर्श का नहीं, फैसले का है, अब तो जागे सरकार!

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष डा. रीता बहुगुणा जोशी ने किसानों से शांति बहाली की अपील की है। पुलिस व शासन को सुझाव दिया है कि बदले की भावना से कार्रवाई तुरंत बंद करे। उन्होंने दनकौर (आगरा) एवं अलीगढ़ में किसान और पुलिस के बीच हुए संघर्ष पर अफसोस जाहिर किया है। वह राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग एवं राष्ट्रीय महिला आयोग से संपर्क कर रही हैं, ताकि तत्काल निर्दोष का उत्पीड़न रोकने में वह मदद करे।

भाजपा प्रवक्ता हृदयनारायण दीक्षित ने कहा है कि भट्टा पारसौल गांव की घटना के लिए पूरी तरह मुख्यमंत्री मायावती जिम्मेदार है। उन्होंने आरोप लगाया कि पूंजीपतियों को लाभ पहुंचाने के लिए किसानों की उपजाऊ भूमि औने-पौने दामों पर जबरिया उन्हें बेची जा रही है। सरकार अपनी ही भूमि अधिग्रहण नीति का पालन नहीं कर रही है।

जनता दल (यूनाइटेड) के प्रदेश अध्यक्ष सुरेश निरंजन भइया व महासचिव सुभाष पाठक ने इस घटना की कड़े शब्दों में निंदा करते हुए मारे गए किसानों के परिजनों को 25-25 लाख रुपये मुआवजा तथा एक आश्रित को सरकारी नौकरी देने की मांग की है।

राष्ट्रीय लोकदल के प्रदेश अध्यक्ष बाबा हरदेव सिंह व प्रदेश महासचिव अनिल दुबे ने राष्ट्रीय अध्यक्ष को भट्टा-पारसौल जाने से रोकने की निंदा की है। लोकदल के राष्ट्रीय अध्यक्ष सुनील सिंह ने कहा कि सरकार किसानों से 850 रुपये प्रति वर्ग मीटर में जमीन ले रही है और उसे 20 हजार रुपये प्रति वर्ग मीटर में बेच रही है। इसे किसी भी लिहाज से सही नहीं ठहराया जा सकता।

रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया (ए) के प्रदेश प्रभारी पवन भाई गुप्ता ने इस घटना की निंदा की है। उत्तर प्रदेश किसान सभा के राष्ट्रीय महासचिव अतुल कुमार अंजान व राम प्रताप त्रिपाठी ने कहा कि भट्टा पारसौल के आसपास के 25 गांवों के किसान 4 माह से धरना दे रहे थे, मगर इनकी सुनी नहीं गई।

भट्टा

आंसुओं में डूबे अन्नदाता

लड़ो मत, समाधान सोचो



90 से 75 फीसदी पर आ पहुंची कृषि निर्भरता



सुरसा की तरह शहर निगल रहे कृषि की भूमि



हर ओर से उठी ‘राष्ट्रीय जमीन नीति’ की मांग



हालात ऐसे ही रहे तो अभी और भड़केंगे शोले



अफसरों के भरोसे रहे तो होंगे फसाद

कब बुझेगी आंदोलन की चिंगारी

भूमि अधिग्रहण की आग में झुलस रहे नोएडा, अलीगढ़, मथुरा, आगरा, अब वक्त कह रहा है, सरकार तुरंत ऐसा फैसला ले कि आंदोलन आगे न बढ़ें

हर चेहरे पर खौफ



मर्द क्या नजर नहीं आ रहे अब बच्चे भी



दहशत में घरों से झांक भी नहीं पाईं महिलाएं



रात में फोर्स ने की घरों में घुसकर मारपीट



अनुरोध भारद्वाज/ आमोद कौशिक

भट्टा-पारसौल। विकास और विस्तार की आंधी विनाश की राह चल रही है तो अन्नदाता किसानों के दिल डोल रहे हैं। ये आवाजें उस हक के लिए उठ रही हैं जो उन्हें मां समान माटी से मिला है। ऐसा हो भी क्यों न? शहरों की फिक्र करते-करते सरकारें खेत, खलिहानों को भूल गई हैं। इसलिए, पूरब से ‘पश्चिम तक जमीन के लिए संघर्ष हो रहे हैं। और फसाद की इन कहानियों के बीच से ‘राष्ट्रीय जमीन अधिग्रहण नीति’ बनाने के शोर भी उठ रहे हैं।

भू-अधिग्रहण को लेकर जैसी चिंगारी कुछ साल पहले गाजियाबाद के बझेड़ा गांव से उठी थी, अब वैसी ही आग में नोएडा, अलीगढ़, मथुरा, आगरा सब झुलसते दिखाई दे रहे हैं। किसानों और पुलिस के बीच संघर्ष की घटनाएं हरियाणा समेत देश के दूसरे राज्यों में ही दोहराई जा रही हैं। सवाल, जमीनों के चक्कर में हो रहीं ऐसी महाभारत टालने का नहीं, समस्या के जड़ से खात्मे का है। हर तरफ शोर उठ हर तरफ हो रही है मगर सरकार फिर भी नहीं जाग रही। यह जानते हुए भी कि समाधान जल्द नहीं सोचे गए तो आगे हालात और भयावह हो सकते हैं।

किसान आंदोलनों से जुड़े बुद्धजीवी एक सुर में कह रहे हैं कि कानून ऐसा नहीं कि किसानों के साथ न्याय हो सके। जिस जमीन से देश की अन्नपूर्ति होती है, उसे संरक्षित करने की तुरंत विशेष नीति बननी चाहिए। वरना, जमीन यूं ही कम होती जाएगी।

जनसख्ंया विस्फोट से शहर इसलिए जूझ रहे हैं कि देश में कृषि निर्भरता 90 फीसदी से घटकर अब 65 फीसदी पर आ पहुंची है।

पश्चिमी यूपी के प्रमुख किसान नेता और अखिल भारतीय जाट आरक्षण समिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष यशपाल मलिक भी इस हकीकत से इत्तफाक रखते हैं।

उनका कहना है कि दमन से नहीं, किसान हक पाकर ही शांत होंगे। और यह हक उनको तब मिलेगा , जब सरकार राष्ट्रीय भूमि अधिग्रहण नीति बनाकर शहर, गांव और कृषि जमीन के बीच संतुलन बनाएं।

आगरा। ग्रेटर नोएडा की आग एत्मादपुर में पहुंचने के बाद चौगान गांव छावनी में तब्दील हो चुका है। दोपहर तक यहां पुलिस प्रशासन की गाड़ियां और पुलिस, पीएसी, आरएएफ के जवान ही दिखाई दे रहे थे। चौगान के पुल पर बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात कर दिया गया है। यहां अधिकारियों ने कैंप कार्यालय बना लिया है। चौगान में डीएम अजय चौहान, डीआईजी असीम अरुण, एसपी फीरोजाबाद, पुलिस के 400 जवान, शहर और देहात के फोर्स के साथ ही दो कंपनी पीएसी और एक कंपनी आरएएफ के जवान गश्त कर रहे हैं। हालिंक पुलिस को गांव में जाने की इजाजत नहीं है।

झड़पों में घायल हुए एक

दर्जन पुलिसकर्मी

चौगान में हुए हिंसक संघर्ष में दर्जन भर पुलिसकर्मी घायल हो गए। एसएन इमरजेंसी पहुंचे घायलों में पीएसी 15वीं बटालियन के एचसीपी धर्मपाल सिंह, सत्यनारायण, लक्ष्मण सिंह, ऐबरन सिंह, अनिल शर्मा, प्रतिसार निरीक्षक जनक सिंह, कांस्टेबल पुष्पेंद्र सिंह, चालक अशोक कुमार, एचसीपी रामदेव और वीरेश कुमार शामिल हैं।

अगस्त 2010 से चल रही जमीन की जंग

यमुना एक्सप्रेस और जेपी के लिए लैंड पार्सल के लिए भूमि अधिग्रहण के मामले में किसानों की हक की लड़ाई अगस्त 2010 से चल रही है। इस मामले में किसानों और प्रशासन की बीच कई बार खूनी टकराव हो चुका है। किसानों का कहना है कि उनकी उपजाऊ जमीन को जबरन औने पौने दामों में कब्जाने की साजिश हो रही है। इसी के चलते एत्मादपुर में किसानों ने अपने हक की आवाज बुलंद की। 14 अगस्त 2010 को किसान घरों को छोड़कर सड़क पर उतर आए थे। 16 अगस्त को पुलिस की कर्मियों की रायफल छीनने की घटना हुई। इसको लेकर तनाव की स्थिति की पैदा हो गई थी। 17 को अगस्त को किसान और पुलिस एक बार फिर आमने सामने आ गए। दोनों ओर से जमकर पथराव और आगजनी हुई। इस घटना में एसडीएम और सीओ चुटैल हो गए थे।

छावनी में बदल गया चौगान

केंद्रीय नीति बनाने का समय आया

मैगसेसे पुरुष्कार विजेता जलपुरुष राजेन्द्र सिंह भी मानते हैं कि कृषि योग्य जमीन के संरक्षण और आवास-उद्योगों के लिए गैर कृषि की जमीनों का इस्तेमाल ही इस समस्या का स्थाई समाधान हो सकता है। यह तभी संभव है, केन्द्रीय जमीन नीति बने। कितने ही किसान आंदोलनों की अगुआई कर चुके किसान संघर्ष समिति के सचिव सलेक भैया ने भी यही राय जाहिर की है।

आगरा

भटटा-पारसौलके हर घर में मातम

राकेश टिकैत बोले, समाधान करो

गाजियाबाद। भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत ने कहा कि अब समय आ गया है कि भूमि अधिग्रहण के मुद्दे का सरकार स्थायी समाधान निकाले। अगर ऐसा नहीं हुआ तो माहौल और खराब हो सकता है। नोएडा में गिरफ्तारी के बाद उन्होंने ‘अमर उजाला’ से बातचीत में कहा कि जमीन का मसला बहुत गंभीर हो गया है। भाकियू हर तरह से किसानों से साथ है। अगर प्रशासन चाहे तो भाकियू बातचीत के लिए आगे आ सकती है लेकिन किसानों के बीच जाने की इजाजत प्रशासन नहीं दे रहा है। भट्टा में शनिवार को जो भी हुआ उसके लिए किसी एक पक्ष को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता। मारे गए पुलिसकर्मी भी किसानों के बेटे थे। डीएम को गोली लगना भी गलत है। इसलिए जरूरत इस बात की है कि किसानों और प्रशासन के बीच जो अविश्वास का माहौल बन गया है, उसे समाप्त किया जाए।

अलीगढ़। टप्पल आंदोलन से चर्चा में आये जिकरपुर का ऐतिहासिक धरनास्थल भट्टा पारसौल और आगरा के हिंसक आंदोलन के बाद ररिवार को संगीनों के साये में रहा। यहां बड़ी मात्रा में फोर्स की तैनाती से किसान जिकरपुर गांव के अंदर ही रहे। शनिवार को हिंसक संघर्ष के बाद किसानों ने रविवार को जिकरपुर में पंचायत करने का ऐलान किया था, लेकिन फोर्स की मौजूदगी के कारण ये पंचायत सार्वजनिक न होकर गोपनीय ढंग से होती रही। किसान अपने अपने घरों में इस आंदोलन की आगे की रणनीति बनाते रहे।

धरनास्थल पर केवल फोर्स ही मौजूद रही। तेज धूप और गर्मी के कारण फोर्स भी यमुना एक्सप्रेस-वे के ठीक नीचे जिकरपुर-कनसेरा लिंक रोड पर डेरा जमाये रही। ये रास्ता ही जिकरपुर को कनसेरा से जोड़ता है।

इस दौरान एडीएम प्रशासन शत्रुघ्न सिंह, एसडीएम खैर विजय कुमार, एसपी ग्रामीण प्रेमचंद्र के नेतृत्व में बड़ी संख्या में पुलिस फोर्स मौजूद रही। श्यारौल से घाघौंली और गौराला तक पुलिस प्रशासनिक अधिकारी पेट्रोलिंग करते रहे। ये पूरा इलाका 10 से 12 किमी का है। अलीगढ़ के श्यारौल से मथुरा के नौझील थाने की सीमा तक ये चहलकदमी दोपहर बाद तक जारी रही।

इंटरचेंज पर होता रहा काम:यमुना एक्सप्रेस वे के टप्पल से सटे हुए सभी कंस्ट्रक्शन प्वाइंट रविवार सुबह से ही पुलिस फोर्स की कड़ी निगरानी में रहे। टप्पल-फरीदाबाद रोड पर बने रहे इंटरचेंज पर धीमी गति से कामकाज होता रहा। टप्पल-फरीदाबाद रोड पर निमार्णाधीन इंटरचेंज से ही कामकाम दो तरह से बंट गया था। इंटरचेंज से जिकरपुर होते हुए घांघौली (मथुरा की ओर) तक कहीं भी इस दौरान कोई कामकाज नहीं हो सका जबकि इंटरचेंज से श्यारौल तक (बुलंदशहर की ओर) कामकाज धीमी गति से चलता रहा। हालांकि काम करने वाले मजदूरों की संख्या कम ही रही।

पीएसी और पुलिस तैनात, तनाव

अलीगढ़

आंखों देखी
भट्टा-पारसौल में हालात बिगड़ने के बाद पीएसी को हटाकर आरएएफ की एक दर्जन कंपनियां तैनात
दोनों गांवों को सुरक्षा घेरे में ले लिया गया था, किसी को गांव में जाने की इजाजत नहीं

शासन ने स्पेशल डीजी बृजलाल को मौके पर भेजा



किसानों की गिरफ्तारी के लिए दूसरे दिन भी छापे